Porcupyn's Blog

June 26, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 15

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

aaj ham apnee duwaaon – lyrics from giitaayan

आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे (2)

आप तो आँख मिलाते हुए शरमाते हैं,
आप तो दिल के धड़कने से भी डर जाते हैं
फिर भी ये ज़िद्द्‌्‌ है के हम ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे,
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे (2)

प्यार करना दिल-ए-बेताब बुरा होता है
सुनते आये हैं के ये ख्वाब बुरा होता है
आज इस ख़्वाब की ताबीर मगर देखेंगे
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे (2)

जानलेवा है मुहब्बत का समा आज की रात
शमा हो जयेगी जल जल के धुंआ आज की रात
आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे (2)
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे (2)

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