Porcupyn's Blog

July 31, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 52

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

ankhiyon ke jharokhon se – lyrics from giitaayan

अखियों के झरोखों से, मैने देखा जो सांवरे
तुम दूर नज़र आए, बड़ी दूर नज़र आए
बंद करके झरोखों को, ज़रा बैठी जो सोचने
मन में तुम्हीं मुस्काए, बस तुम्हीं मुस्काए
अखियों के झरोखों से

इक मन था मेरे पास वो अब खोने लगा है
पाकर तुझे हाय मुझे कुछ होने लगा है
इक तेरे भरोसे पे सब बैठी हूँ भूल के
यूँही उम्र गुज़र जाए, तेरे साथ गुज़र जाए

जीती हूँ तुम्हें देख के, मरती हूँ तुम्हीं पे
तुम हो जहाँ साजन मेरी दुनिया है वहीं पे
दिन रात दुआ माँगे मेरा मन तेरे वास्ते
कहीं अपनी उम्मीदों का कोई फूल न मुरझाए
अखियों के झरोखों से …

मैं जब से तेरे प्यार के रंगों में रंगी हूँ
जगते हुए सोई रही नींदों में जगी हूँ
मेरे प्यार भरे सपने कहीं कोई न छीन ले
दिल सोच के घबराए, यही सोच के घबराए
अखियों के झरोखों से …

कुछ बोलके ख़ामोशियाँ तड़पाने लगी हैं
चुप रहने से मजबूरियाँ याद आने लगी हैं
तू भी मेरी तरह हँस ले, आँसू पलकों पे थाम ले,
जितनी है ख़ुशी यह भी अश्कों में ना बह जाए
अँखियों के झरोखों से

कलियाँ ये सदा प्यार की मुसकाती रहेंगी
ख़ामोशियाँ तुझसे मेरे अफ़साने कहेंगी
जी लूँगी नया जीवन तेरी यादों में बैठके
ख़ुशबू जैसे फूलों में उड़ने से भी रह जाए
अँखियों के झरोखों से

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July 30, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 51

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

akelaa chal re fakeeraa chal re – lyrics from giitaayan

हो, अकेला चल रे, हो, फ़कीरा चल रे
ओ सुनके तेरी पुकार, संग चलने को तेरे कोई हो न हो तैयार
हिम्मत न हार, चल चला चल अकेला चल चला चल …
फ़कीर चल चला चल

बचपन में हुआ घर से बेघर
आज तलक ना बस पाया
घर में लगी जो आग वो बुझ गई, जलती रही तेरी काया
बीती बातें बिसार, ऐसा कोई नहीं जो न हो
ग़म से बेज़ार, हिम्मत न हार …

जिसने लिया संकल्प सभी के
दुख और दर्द मिटाने का
उसपे हंसा जग उसने कभी ना, पाया साथ ज़माने का
ले ले औरों का भार, कोई जिनका नहीं है उनका
जीवन संवार, हिम्मत न हार …

सूरज चंदा तारे जुगनू
सबकी अपनी हस्ती है
जिसमें जितना नीर हो बदली, उतनी देर बरसती है
तेरी शकती अपार, तू तो लाया रे अकेला गंगा
धरती पे उतार, हिम्मत न हार …

वो क्या समझे दर्द किसी का
जिसने दुख ना झेला हो
दो अब और दो हाथ हो जिसके, वो काहे को अकेला हो
आए संकट हज़ार, तेरी ख़ातिर कोई न खोले
कभी न अपना द्वार, हिम्मत न हार …

Hemlata – happy version

Hemlata – sad version

Mahendra Kapoor

July 29, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 50

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

aise na mujhe tum dekho – lyrics from giitaayan

ऐसे न मुझे तुम देखो
सीने से लगा लूँगा
तुम को मैं चुरा लूँगा तुमसे
दिल में बसा (छुपा???) लूँगा

तेरे दिल से ऐ दिलबर दिल मेरा कहता है
प्यार के दुश्मन लोग मुझे डर लगता रहता है
थाम लो तुम मेरी बाहों मैं तुम्हें सम्भालूँगा
तुमको मैं चुरा लूँगा तुमसे
दिल में बसा लूँगा

धीमी-धीमी आग से शोला भड़काया है
दूर से तुमने इस दिल को कितना तड़पाया है
मैं अब इस दिल के सारे अर्मां निकालूँगा
तुम को मैं चुरा लूँगा तुमसे
दिल में बसा लूँगा

प्यार के दामन में चुन कर हम फूल भर लेंगे
रास्ते के सारे काँटे दूर कर देंगे
जान-ए-मन तुमको अपनी मैं जान बना लूँगा
तुम को मैं चुरा लूँगा तुमसे
दिल में बसा लूँगा

July 28, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 49

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

ae bhai zara dekh ke chalo – lyrics from giitaayan

(ए भाई, ज़रा देखके चलो, आगे ही नहीं पीछे भी
दायें ही नहीं बायें भी, ऊपर ही नहीं नीचे भी) – 2
ए भाई

तू जहाँ आया है वो तेरा – घर नहीं, गाँव नहीं
गली नहीं, कूचा नहीं, रस्ता नहीं, बस्ती नहीं

दुनिया है, और प्यारे, दुनिया यह एक सरकस है
और इस सरकस में – बड़े को भी, चोटे को भी
खरे को भी, खोटे को भी, मोटे को भी, पतले को भी
नीचे से ऊपर को, ऊपर से नीचे को
बराबर आना-जाना पड़ता है

(और रिंग मास्टर के कोड़े पर – कोड़ा जो भूख है
कोड़ा जो पैसा है, कोड़ा जो क़िस्मत है
तरह-तरह नाच कर दिखाना यहाँ पड़ता है
बार-बार रोना और गाना यहाँ पड़ता है
हीरो से जोकर बन जाना पड़ता है) – 2

गिरने से डरता है क्यों, मरने से डरता है क्यों
ठोकर तू जब न खाएगा, पास किसी ग़म को न जब तक बुलाएगा
ज़िंदगी है चीज़ क्या नहीं जान पायेगा
रोता हुआ आया है चला जाएगा
कैसा है करिश्मा, कैसा खिलवाड़ है
जानवर आदमी से ज़्यादा वफ़ादार है
खाता है कोड़ा भी रहता है भूखा भी
फिर भी वो मालिक पर करता नहीं वार है

और इन्साण यह – माल जिस का खाता है
प्यार जिस से पाता है, गीत जिस के गाता है
उसी के ही सीने में भोकता कटार है

हाँ बाबू, यह सरकस है शो तीन घंटे का
पहला घंटा बचपन है, दूसरा जवानी है
तीसरा बुढ़ापा है

और उसके बाद – माँ नहीं, बाप नहीं
बेटा नहीं, बेटी नहीं, तू नहीं,
मैं नहीं, कुछ भी नहीं रहता है
रहता है जो कुछ वो – ख़ाली-ख़ाली कुर्सियाँ हैं
ख़ाली-ख़ाली ताम्बू है, ख़ाली-ख़ाली घेरा है
बिना चिड़िया का बसेरा है, न तेरा है, न मेरा है

July 27, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 48

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

public hai ye sab jaanti hai – lyrics from giitaayan

ऐ बाबू ये public hai public
ये जो public है सब जानती है
ये जो public है
अजी अन्दर क्या है बाहर क्या है
ये सब कुछ पहचानती है
ये जो public …

ये चाहे तो सर पे बिठा ले चाहे फेंक दे नीचे
पहले ये पीछे भागे फिर भागो इसके पीछे
अरे दिल टूटे तो अरे ये रूठे तो
तौबा कहाँ फिर मानती है
ये जो public …

क्या नेता क्या अभिनेता दे जनता को जो धोखा
पल में शोहरत उड़ जाए ज्यों एक पवन का झोंका
अरे ज़ोर न करना अरे शोर न करना
ज़ोर न करना शोर न करना
अपने शहर में शांति है
ये जो public …

हीरे-मोती तुमने छुपाए कुछ हम लोग न बोले
अब आटा-चावल भी छुपा तो भूखों ने मुँह खोले
अरे भीख न माँगे कर्ज़ न माँगे
ये अपना हक़ माँगती है
ये जो public …

July 26, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 47

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

agar saaz chheDaa – lyrics from giitaayan

अगर साज़ छेड़ा तराने बनेंगे
तराने बनेंगे फ़साने बनेंगे
तराने बने तो, फ़साने बने तो
फ़साने बने तो दीवाने बनेंगे
अगर साज़ छेड़ा तराने बनेंगे …

फ़साने बने तो सुनेगी ये महफ़िल
सुनेगी ये महफ़िल बड़ी होगी मुशकिल
रुसवाइयों के बहाने बनेंगे
अगर साज़ छेड़ा तराने बनेंगे …

बहानों से फिर तो मुलाक़ात होगी
यूँही दिन कटेगा बसर रात होगी
नये दोस्त इक दिन पुराने बनेंगे
अगर साज़ छेड़ा तराने बनेंगे …

दीवनों पे हँसता है सारा ज़माना
ज़माना मुहब्बत का दुशमन पुराना
दीवाने नहीं हम सयाने बनेंगे
सयाने नहीं हम
सयाने नहीं हम दीवाने बनेंगे
अगर साज़ छेड़ा तराने बनेंगे …

July 25, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 46

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

agar dilbar kee rusvaaee – lyrics from giitaayan

अगर दिलबर की रुस्वाई हमें मंज़ूर हो जाये
(सनम तू बेवफ़ा के नाम से मषूर हो जाये) – 2
अगर दिल्बर की … हो जाये
सनम … हो जाये

(हमें फ़ुर्सत नहीं मिलती) – 2
कभी आँसू बहाने से
(कई ग़म पास आ बैठे) -2
(तेरे एक दूर जाने से) – 2
(अगर तू पास आ जाये तो हर ग़म दूर हो जाये) – 2
सनम तू … हो जाये

(वफ़ा का वास्ता देकर) – 2
मोहब्बत आज रोती है
(न ऐसे खेल इस दिल से) – 2
(ये नज़ुक चीज़ होती है) – 2
(ज़रा सी ठेस लग जाये तो शीशा चूर हो जाये) -2
सनम तू … हो जाये

(तेरे रंगीन होंठों को) – 2
कमल कहने से डरते हैं
(तेरी इस बेरुख़ी पे हम) – 2
(ग़ज़ल कहने से डरते हैं) – 2
(कहीं ऐसा न हो तू और भी मग़रूर हो जाये) – 2

अगर दिल्बर कि थ्री दोत्स हो जाये
सनम तू … हो जाये

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