Porcupyn's Blog

July 13, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 32

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

main tawaayaf hoon – lyrics from giitaayan

आपके शहर में आई हूँ शौक़ से
आपके ज़ौक़ से फिर भी डरती हूँ मैं
अपना दिल तोड़कर दिल्लगी छोड़कर
एक ताज़ा ग़ज़ल पेश करती हूँ मैं
कि ( जश्न-ए-शादी है रात आधी है )-2
ख़ुशनसीबों को शब मुबारक हो
मैं पशेमाँ हूँ कुछ परेशाँ हूँ
मेरे अश्कों को आप मत देखो
जान-ए-महबूबी दर्द में डूबी
चीज़ गाऊँगी मुस्कुराऊँगी
ग़म सही दिल में फिर भी महफ़िल में
( क्या किसी से )-2 मैं शिकवा करूँगी
( मैं तवायफ़ हूँ मुजरा करूँगी )-2

( दिल की दुश्मन हूँ मैं ग़म की दुल्हन हूँ )-2
टूटे वादों से भूली यादों से
जाम जलती है चोट लगती है
फिर भी ज़िन्दा हूँ मैं शर्मिंदा हूँ
ऐ मेहरबानो मेरे दीवानो ठीक कहते हो चन्द लोगों को
प्यार करने का हक़ नहीं होता
( क्या मैं फिर ये )-2 तमन्ना करूँगी
मैं तवायफ़ हूँ …

( सामने है तू बाँध लूँ घुँघरू )-2
रक़्स जारी हो रात सारी हो
फिर ख़ुदा जाने तेरे दीवाने
कब तुझे देखें जब तुझे देखें
कुछ न हो बाकी इसलिये साक़ी
आज पीने दे ज़ख्म सीने दे
भूल जाने दे डगमगाने दे
( होश में रहके )-2 मैं क्या करूँगी
मैं तवायफ़ हूँ …

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