Porcupyn's Blog

September 29, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 112

Filed under: Uncategorized — Porcupyn @ 7:53 am

(आप के इनायतेँ आप के करम
आप ही बताएँ कैसे भूलेँगे हम) x २

१) (इक बुझे शमा की तरह साज-ओ-दिल मेरा
देवता की आरती का बन गया दिया) x २

२) (इल्तिजा यही है दिल-ए-बेकरार की
तोड़ना न डोर कभी मेरे प्यार की) x २

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September 28, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 111

Filed under: Uncategorized — Porcupyn @ 2:41 pm

yuu.N hii dil ne – dil hii to hai (1963)

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

हमें भी नहीं इल्म, हम जिस पे रोए
वो बीती रुतें हैं के आता ज़माना -२

ग़म-ए-दिल है और ग़म-ए-ज़िंदगी भी
न इसका ठिकाना न उसका ठिकाना -२

कोई किसपे तड़पे, कोई किसपे रोए
इधर दिल जला है, उधर आशियाना -२

churaa le na tumako ye mausam

मु : चुरा ले ना तुमको ये मौसम सुहाना
खुली वादियों में अकेली न जाना -२
ल : लुभाता है मुझको ये मौसम सुहाना
मैं जाऊँगी तुम मेरे पीछे न आना -२

मु : लिपट जाएगा कोई बेबाक झोंका
जवानी की रौ में ना आँचल उड़ाना
ल : मेरे वास्ते तुम परेशां न होना
मुझे ख़ूब आता है दामन बचाना -२
मैं जाऊँगी तुम …

मु : घटा भी कभी चूम लेती है चेहरा
समझ सोच कर रुख़ से ज़ुल्फ़ें हटाना
ल : घटा मेरे नज़दीक आकर तो देखे
इन आँखों ने सीखा है बिजली गिराना -२

मु : तुम एक फूल हो तुमको ढूँढूँगा कैसे
कहीं मिल के फूलों में गुम हो न जाना
ल : जो फूलों में रंगत मिले भी तो क्या है
जुदा मेरी ख़ुश्बू जुदा मुस्कुराना -२
मैं जाऊँगी तुम …

September 27, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 110

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

chalo re Dolii uThaao kahaar – lyrics from giitaayan

चलो रे डोली उठाओ कहार
पीया मिलन की रुत आई
पी की नगरी ले जाओ कहार
पीया मिलन की रुत आई

जिन नैनों की तू है ज्योती
उन नैनों से बरसे मोती
दावा नहीं है कोई ज़ोर नहीं है
बेटी सदा ही पराई होती
जल्दी नैहर से ले जाओ, कहार
पीया मिलन की रुत आई

छाई है देखो हरियाली
आई है रुत खुशियों वाली
हर आशा पर्वान (???) चढ़ी
दिन है दसहरा रात दीवाली
गले डाल बाहों का हार, कहार
पीया मिलन की रुत आई

तन मैके मन तेरी नगरिया
उड़ जाऊँ मैं बनके बदरिया
चाँद नगर को चली चकोरी
प्यासी हूँ मिलन की साँवरिया
मेरे सपने सजाओ, कहार
पीया मिलन की रुत आई

सूनी पड़ी भैया की हवेली
व्याकुल बहना रह गई अकेली
जिन संग नाची जिन संग खेली
छूट गई वो सखी सहेली
अब न देरी लगाओ, कहार
पीया मिलन की रुत आई

September 26, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 109

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

chalo diladaar chalo, chaa.Nd ke paar chalo – lyrics from giitaayan

चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो
हम हैं तैयार चलो

(आओ खो जाएं सितारों में कहीं) – 2
छोड़ दें आज ये दुनिया ये ज़मीं, दुनिया ये ज़मीं
चलो दिलदार…

(हम नशे में हैं सम्भालो हमें तुम) – (2)
नींद आती है जगा लो हमें तुम, जगा लो हमें तुम
चलो दिलदार…

(ज़िंदगी खत्म भी हो जाये अगर) – (2)
न कभी खत्म हो उल्फ़त का सफ़र, उल्फ़त का सफ़र
चलो दिलदार…

September 25, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 108

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

chalate chalate, yuu.Nhii koii mil gayaa thaa – lyrics from giitaayan

चलते चलते, चलते चलते
यूँही कोई मिल गया था, यूँही कोई मिल गया था
सरे राह चलते चलते, सरे राह चलते चलते
वहीं थमके रह गई है, वहीं थमके रह गई है
मेरी रात ढलते ढलते, मेरी रात ढलते ढलते

जो कही गई है मुझसे, जो कही गई है मुझसे
वो ज़माना कह रहा है, वो ज़माना कह रहा है
के फ़साना
के फ़साना बन गई है, के फ़साना बन गई है
मेरी बात टलते टलते, मेरी बात टलते टलते

यूँही कोई मिल गया था, यूँही कोई मिल गया था
सरे राह चलते चलते, सर-ए-राह चलते चलते …

शब-ए-इंतज़ार आखिर, शब-ए-इंतज़ार आखिर
कभी होगी मुक़्तसर भी, कभी होगी मुक़्तसर भी
ये चिराग़
ये चिराग़ बुझ रहे हैं, ये चिराग़ बुझ रहे हैं
मेरे साथ जलते जलते, मेरे साथ जलते जलते

ये चिराग़ बुझ रहे हैं, ये चिराग़ बुझ रहे हैं – (3)
मेरे साथ जलते जलते, मेरे साथ जलते जलते

यूँही कोई मिल गया था, यूँही कोई मिल गया था
सर-ए-राह चलते चलते, सर-ए-राह चलते चलते …

September 24, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 107

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

chalate chalate, mere ye giit yaad rakhanaa – lyrics from giitaayan

चलते चलते, मेरे ये गीत याद रखना
कभी अलविदा ना कहना
कभी अलविदा ना कहना
रोते हँसते, बस यूँही तुम
गुनगुनाते रहना
कभी अलविदा …

प्यार करते करते, हम तुम कहीं खो जाएंगे
इन्ही बहारों के, आँचल में थक के सो जाएंगे
सपनों को फिर भी, तुम यूँही सजाते रहना
कभी अलविदा …

बीच राह में दिलवर, बिछड़ जाएं कहीं हम अगर
और सूनी सी लगे तुम्हें, जीवन की ये डगर
हम लौट आएंगे, तुम यूँही बुलाते रहना
कभी अलविदा …

(slow)
चलते चलते …
रोते हँसते …

अलविदा तो अंत है
और अंत किसने देखा
ये जुदाई ही
मिलन है जो हम ने देखा
यादों में आकर
तुम यूँही गाते रहना
कभी अलविदा …

September 23, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 106

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

chalaa jaataa huu.N kisii kii dhun me.n – lyrics from giitaayan

चला जाता हूँ, किसी की धुन में
धड़कते दिल के, तराने लिये
मिलन की मस्ती, भरी आँखों में
हज़ारों सपने, सुहाने लिये, चला जाता हूँ…

ये मस्ती के, नज़ारें हैं, तो ऐसे में
सम्भलना कैसा मेरी क़सम
तू लहराती, डगरिया हो, तो फिर क्यूँ ना
चलूँ मैं बहका बहका रे
मेरे जीवन में, ये शाम आई है
मुहब्बत वाले, ज़माने लिये, चला जाता हूँ…

वो आलम भी, अजब होगा, वो जब मेरे
करीब आएगी मेरी क़सम
कभी बइयाँ छुड़ा लेगी, कभी हँसके
गले से लग जाएगी हाय
मेरी बाहों में, मचल जाएगी
वो सच्चे झूठे बहाने लिये, चला जाता हूँ…

बहारों में, नज़ारों में, नज़र डालूँ
तो ऐसा लागे मेरी क़सम
वो नैनों में, भरे काजल, घूँघट खोले
खडी हैं मेरे आगे रे
शरम से बोझल झुकी पलकों में
जवाँ रातों के फ़साने लिये, चला जाता हूँ…

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