Porcupyn's Blog

September 6, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 89

Filed under: Music — Porcupyn @ 11:59 pm

bhiigii bhiigii raato.n me.n miiThii miiThii baato.n – lyrics from giitaayan

किशोर: भीगी भीगी रातों में, मीठी मीठी बातों में
ऐसी बरसातो में, कैसा लगता है?

लता: (ऐसा लगता है तुम बनके बादल,
मेरे बदन को भिगोके मुझे, छेड़ रहे हो ओ
छेड़ रहे हो ) – 2

लता: (अम्बर खेले होली उई माँ
भीगी मोरी चोली, हमजोली, हमजोली ) – 2
ओ, पानी के इस रेले में सावन के इस मेले में
छत पे अकेले में
कैसा लगता है

किशोर: ऐसा लगता है
तू बनके घटा अपने सजन को भिगोके खेल खेल रही हो ओ
खेल रही हो

लता: ऐसा लगता है
तुम बनके बादल मेरे बदन को भिगोके मुझे छेड़ रहे हो हो.
छेड़ रहे हो

किशोर: (बरखा से बचा लूँ तुझे
सीने से लगा लूँ
आ छुपा लूं आ छूपा लूँ ) – 2
दिल ने पुकारा देखो रुत का इशारा देखो
उफ़ ये नज़ारा देखो
कैसा लगता है, बोलो?

लता: ऐसा लगता है कुछ हो जायेगा
मस्त पवन के ये झोकें सैंया देख रहे हो ओ
देख रहे हो
ऐसा लगता है
तुम बनके बादल मेरे बदन को भिगोके मुझे छेड़ रहे हो हो
छेड़ रहे हो

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