Porcupyn's Blog

September 28, 2014

Songs of the 1970s – my favourites – 111

Filed under: Uncategorized — Porcupyn @ 2:41 pm

yuu.N hii dil ne – dil hii to hai (1963)

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

हमें भी नहीं इल्म, हम जिस पे रोए
वो बीती रुतें हैं के आता ज़माना -२

ग़म-ए-दिल है और ग़म-ए-ज़िंदगी भी
न इसका ठिकाना न उसका ठिकाना -२

कोई किसपे तड़पे, कोई किसपे रोए
इधर दिल जला है, उधर आशियाना -२

churaa le na tumako ye mausam

मु : चुरा ले ना तुमको ये मौसम सुहाना
खुली वादियों में अकेली न जाना -२
ल : लुभाता है मुझको ये मौसम सुहाना
मैं जाऊँगी तुम मेरे पीछे न आना -२

मु : लिपट जाएगा कोई बेबाक झोंका
जवानी की रौ में ना आँचल उड़ाना
ल : मेरे वास्ते तुम परेशां न होना
मुझे ख़ूब आता है दामन बचाना -२
मैं जाऊँगी तुम …

मु : घटा भी कभी चूम लेती है चेहरा
समझ सोच कर रुख़ से ज़ुल्फ़ें हटाना
ल : घटा मेरे नज़दीक आकर तो देखे
इन आँखों ने सीखा है बिजली गिराना -२

मु : तुम एक फूल हो तुमको ढूँढूँगा कैसे
कहीं मिल के फूलों में गुम हो न जाना
ल : जो फूलों में रंगत मिले भी तो क्या है
जुदा मेरी ख़ुश्बू जुदा मुस्कुराना -२
मैं जाऊँगी तुम …

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